मेरा मानना है की प्यार दो दिलो का बंधन होता है जो कि किसी के सामने य़ू ही प्रदर्शित करने के लिए नही होता। न जाने यह कैसी मानसिकता होती है जो लोगो के सामने य़ू ही प्रदर्शित कर देते है जीससे समाज के अंदर प्यार को लेकर नहीं बल्कि एक हीन भावना पैदा होती जा रही है की यह केवल एक आकर्षण होता है और कुछ नही । जहा पहले प्यार करने वालो की मिसाल दी जाती थी वहा अब इसको केवल और केवल आकर्षण के तौर पर आंका जाता है । प्यार करने वालो के लिए यह स्थिति अच्छी नही है।

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