Monday, 16 May 2016

इसे प्यार नहीं सिर्फ आकर्षण कहेंगे

मेरा मानना है की प्यार दो दिलो का बंधन होता है जो कि किसी के सामने य़ू ही प्रदर्शित करने के लिए नही होता। न जाने यह कैसी मानसिकता होती है जो लोगो के सामने य़ू ही प्रदर्शित कर देते है जीससे समाज के अंदर प्यार को लेकर नहीं बल्कि एक हीन भावना पैदा होती जा रही है की यह केवल एक आकर्षण होता है और कुछ नही । जहा पहले प्यार करने वालो की मिसाल दी जाती थी वहा अब इसको केवल और केवल आकर्षण के तौर पर आंका जाता है । प्यार करने वालो के लिए यह स्थिति अच्छी नही है।

Friday, 13 May 2016

बाल श्रम

बाल श्रम का मतलब ऐसे कार्य से है ,जिसमे की कर्य करने वाला  व्यक्ति कानुनन निर्धारित आयु सीमा से कम उम्र का होता है। भारत में बाल श्रम की कानुनन  आयु 18 वर्ष निर्धारित है। इस प्रथा को समाप्त करने के लिए भारत सहित अंतर्राष्ट्रीय समुदाय व्यापक स्तर पर प्रयास कर रहा है । वास्तव में देखा जाए तो यह प्रथा समाजिक, नैतिक  या मानवीय स्तर पर बहुत ही निंदनीय है।
                                                    प्रायः  बाल श्रम कई रुपों में दिखाई पढ़ता है। जिसमे कुछ बाल वेश्या वृस्ति, माता पिता के व्यापार में मदद,स्वंय का लघु व्यावसाय या अन्य छोटे- मोटे काम करना कई बार बच्चे पर्यटको के लिए बाल गाइड का भी काकम करते है। इसके अलावा होटलों में वेटर के रूप में बर्तन धोने में भी इनके श्रम का प्रयोग होता है। कई बार इन्हें बंधुआ मजदूरो के रूप में कारखानों,फैक्ट्रीयों और घरो में भी कार्य पर लगाया जाता है।बदले में इन्हें घाटियाँ किस्म का खाना एवं बेहद कम वेतन दिया जाता है। इन्हें इनके मुल अधिकारों जैसे शिक्षा,स्वास्थ्य, चिकित्सा इत्यादी से भी अलग रहना पड़ता है।  
 
                                   बाल श्रम का प्रमुख कारण माता पिता की गरीबी को ही माना जाता है। किन्तु आज सरकार तरह-तरह के कानून बनाकर बाल श्रम को रोकने का प्रयास कर रही है। हमें भी लोगो की जागरुकता फैला कर सरकार द्वारा प्रदान मुफ्त चिकित्सा , शिक्षा और गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमो को लोगो तक पहुचना चाहिए । हम दृढ निशचय करते है की हम इस कुप्रथा को समाप्त करने में सरकार की मदद करेंगे और समाज में अपनी सार्थक भगीदारी सूनिश्चित करेंगे ।

Thursday, 12 May 2016

देश से जादा समाज का स्मार्ट होना ज़रूरी

आज कल बात चल रही है की हमारे देश को स्मार्ट कंट्री बनाने की और काफी चेर्चा हो रही है । एक ऐसी जिंदगी हर कोई चाहता है की वो जो चाहए उसे सब कुछ मिल जाये बिना किसी मेहनत के बिना किसी भाग दौड़ के ना तो किसी की शिफारिश की ज़रूरत पड़े सब कुछ ऑनलाइन उपलब्ध हो। बिजली , पानी , पर्यावरण , सुरक्षा , और आधुनिक सुविधाए उपलब्ध हो ऐसा सोचना गलत नही होगा । जहा ना कोई रोक टोक करने वाला हो  जहां हर शहर हर गाँव को मनुष्य के विचारो को उच्च स्तर से जोड़े। लेकिन ऐसा सोचना और करना सिर्फ उन लोगो को फय्देमंद होगा जो पहले से ही स्मार्ट है । जो लोग शहर में रह रहे है उन्हें तो ये सारी सुविधाए मिल ही रही है लेकिन सोचने की बात ये है की क्या हमारे देश कुछ शहर स्मार्ट हो जाने से हमारा समाज भी स्मार्ट हो जायगा तो ऐसा सोचना बिलकुल ही गलत होगा । आज भी हमारे देश में ऐसे बहुत से पिछड़े गाँव है जंहा आधे से जादा  को पढाई के बारे में नही पता और अगर जानते भी है तो वो पढना नही चाहते ऐसे बहुत से गाँव है जो सिक्षा से परे है ना तो वहा बिजली है न तो कोई विद्यालय है । आज भी हमारे देश में ऐसे बहुत से गरीब लोग है जिनको एक समय का खाना तक नही नसीब होता कुछ तो ऐसे है जो की ₹80, ₹100 में आपने परिवार का पेट पलने में लगे रहते है। स्मार्ट शहर में रहने वाले लोग जाहिर है वो स्मार्ट ही होंगे तो ऐसे में हमारे देश के गाँव का विकास कैसे होगा गाँव में सही से मोबाइल फ़ोन तक सही से नही चलाने नही आता ना सही से नेटवर्क आता है तो कैसे वह क लोग स्मार्ट बन्यंगे जहां आज के समय में सब कुछ ऑनलाइन की सुविधा हो गई ही। हमारा देश ऐसा देश है जहां जनसँख्या बढती चली जा रही है और उसको रोकने का कोई उपाए नही किया जा रहा है ना ही कोई स्कूल का ना ही रहने के ठिकाने का तो ऐसे कैसे समाज स्मार्ट हो पायगा?

शहर स्मार्ट बने जन सुविधाए बेहतर हो और आम नागरिक का जीवन सुखमय हो येही तो विकास का पैमाना है । हमारे एहा आज भी सिक्षा , स्वास्थ्य ,संचार आम लोगो के पास किस तरह स उपलब्ध है हम सभी जानते है और आने वाले समय में किस तरह उपलब्ध होंगे , स्मार्ट बनने के यह कुछ मुख्य कारन होंगे। स्मार्ट सिटी को ले कर जो सोचा जा रहा है क्या उससे एक भ्रम पैदा हो रहा है ? की जो हम तरीके आपना रहे ही स्मार्ट बनने के लिए वो सही भी है की नही । हमारे एहा दिन प्रतिदिन सिक्षा बिगडती चली जा रही है तो समाज आने वाले कुछ सालो बाद स्मार्ट कैसे बन पायगा। हम देखते किसान पैसे के लिए सब्जियों में दवाइयां मिलाते है खाने की चीज़ तक ज़हरीली हो गई है तो सबसे पहले इस्पे चिंता करना चाहिए की सामज में स्मार्ट सुधर कैसे होगा।

Wednesday, 11 May 2016

खेल हुआ जुआ

खेल को खेल की नजरो में गिरा दिया है। हम बात कर रहे है हुखेल की जो की लोगो का  बहुत ही बढ़िया टाइमपास होता है।हम बात करते है आज से 10 साल पहले की लोग खेल का लाभ उठाते थे और आपना मनोरंजन करते थे लेकिन जैसे जैसे हमारा देश विकास कर रहा है उसी प्रकार खेल के विकास में भी वृद्धि हो रही है। इन 10 सालो में बहुत कुछ बदल सा गया है उसी तरह हमारी देश की जनता में भी बद्लाव हो रहा हैं। आज के समय में खेल को खेल की नज़र से नही बल्कि कमाई का जरिया बना लिया है । आज कल के बच्चे तक जानते है की मैच फिक्सिंग क्या होता है और इसी तरह हेर मैच पे  जुआ खेलते है जो की बहुत बुरी आदत है ।आज के समय में ऐसा कोई खेल नही ही जिसमे जुआ ना खेला जाता हो लेकिन सबसे जादा क्रिकेट पे जूवा हो रहा है।
            हाल ही में जो IPL मैच चल रहे है जिसे बहुत ही पसंद किया जाता है क्युकी ये बहुत ही कम समय में खतम हो जाता है तो जनता इसे बहुत पसंद करने लगी है। लेकिन पसंद करने के साथ ही साथ सबसे जादा जुआ खेले  जाने वाला खेल भी हो गया है । आप लोग समझ ही रहे होंगे की क्या कहना चाहता हु। तो आप सभी येही कहना चाहता हु की खेल को खेल की नज़रिए स देखे । खेल को बाज़ार का विस्तार बना देना बहुत ही गलत बात है । हमे हमेशा खेल की इज्ज़त करना चहिये और खेल का मनोरंजन क साथ लाभ उठाना चहिए।

Saturday, 7 May 2016

जिंदगी: कल आज और कल

तजुर्बे ने एक बात सिखाई है ...
किसी की गलतियों को बेनक़ाब ना कर , 
'इश्वर' बैठा है , तू हिसाब ना कर .....

...

कई जीत बाकी है .....
अभी तो पूरी जिंदगी का सार बाकी है ....
यहाँ से चले है नई मंजिल के लिए , 
ये एक पन्ना था अभी तो पूरी किताब बाकी है ....